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ताजपुर में लोको पायलट हत्याकांड: एक हफ्ते बाद भी खाली हाथ पुलिस, हत्या की वजह तक नहीं जान सकी जांच टीम

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समस्तीपुर के ताजपुर में लोको पायलट प्रमोद कापर की गोली मारकर हत्या के एक सप्ताह बाद भी पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी है। हत्या के पीछे की वजह अब तक साफ नहीं हो पाई है, जिससे पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।

समस्तीपुर/आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के ताजपुर थाना क्षेत्र में लोको पायलट प्रमोद कापर की हुई निर्मम हत्या अब सिर्फ एक आपराधिक वारदात नहीं, बल्कि पुलिसिया जांच पर गंभीर सवाल खड़ा करने वाला मामला बनती जा रही है। घटना को बीते एक सप्ताह बीत चुके हैं, लेकिन ताजपुर पुलिस अब तक न तो किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंच सकी है और न ही हत्या के पीछे की असली वजह का खुलासा कर पाई है। इस बीच मृतक के परिजनों में गहरा आक्रोश है और इलाके में यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर इतनी बर्बर हत्या के बाद भी पुलिस के हाथ अब तक खाली क्यों हैं।

बताया जा रहा है कि बीते गुरुवार की रात प्रमोद कापर बाइक से अपने गंतव्य की ओर जा रहे थे। इसी दौरान दर्जिनिया पुल पेट्रोल पंप के पास सुनसान जगह पर अज्ञात अपराधियों ने उन्हें रोक लिया। पहले उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई, और जब वे अधमरी हालत में भी जिंदा थे तो अपराधियों ने उन्हें गोली मार दी। इस पूरी वारदात की क्रूरता ने इलाके के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। परिजनों का कहना है कि यह कोई सामान्य आपराधिक घटना नहीं, बल्कि पूरी योजना के तहत अंजाम दिया गया एक सुनियोजित कत्ल है।

घटना की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अपराधियों ने हत्या के बाद इसे सड़क दुर्घटना का रूप देने की कोशिश की। प्रारंभिक स्तर पर ऐसा माहौल बनाया गया मानो बाइक सवार किसी हादसे का शिकार हुआ हो, लेकिन जब शरीर पर चोटों के निशान, बर्बर पिटाई के सबूत और गोली लगने की बात सामने आई, तब जाकर हत्या की परतें खुलनी शुरू हुईं। यही बिंदु अब पुलिस की शुरुआती जांच पर भी सवाल खड़ा कर रहा है कि क्या पहले ही दिन से जांच को सही दिशा में आगे बढ़ाया गया था या नहीं।

मृतक की पत्नी गीतांजली कुमारी ने ताजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है, जिसमें गुनाई बसही गांव के 9 लोगों को नामजद किया गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि पुलिस तेजी से कार्रवाई करेगी, संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ करेगी और हत्या की वजह को जल्द सामने लाएगी। लेकिन एक सप्ताह बीतने के बाद भी पुलिस की जांच अभी तक स्पष्ट दिशा नहीं पकड़ सकी है। यही कारण है कि अब स्थानीय लोगों के बीच यह धारणा बन रही है कि या तो जांच बेहद सुस्त है, या फिर पुलिस अभी तक किसी निर्णायक सबूत तक पहुंच ही नहीं पाई है।

सूत्रों की मानें तो पुलिस ने कुछ लोगों से पूछताछ जरूर की है, लेकिन अब तक ऐसा कोई खुलासा नहीं हुआ है जिससे यह कहा जा सके कि जांच निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है। पुलिस की ओर से अब तक न तो हत्या की वजह को लेकर कोई आधिकारिक स्थिति स्पष्ट की गई है और न ही यह बताया गया है कि नामजद आरोपियों के खिलाफ क्या ठोस कार्रवाई हुई। इस चुप्पी ने पीड़ित परिवार की बेचैनी और बढ़ा दी है। परिजनों का साफ कहना है कि यदि नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज है, तो फिर अब तक गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई और पुलिस किस सबूत का इंतजार कर रही है।

इलाके के लोगों का भी कहना है कि जिस तरह से सुनसान जगह पर एक व्यक्ति को रोका गया, फिर उसकी बर्बर पिटाई की गई और बाद में गोली मारकर हत्या कर दी गई, उससे साफ है कि अपराधी पूरी तैयारी के साथ आए थे। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या पुलिस इस हत्याकांड को महज सामान्य आपसी रंजिश या स्थानीय विवाद के चश्मे से देख रही है, जबकि वारदात की प्रकृति कहीं अधिक गंभीर और संगठित नजर आती है। यही वजह है कि अब पुलिस की जांच पद्धति और उसके दावों दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

परिवार का आरोप है कि प्रमोद कापर को न सिर्फ बेरहमी से मारा गया, बल्कि हत्या के बाद मामले को भ्रमित करने की कोशिश भी की गई। इससे यह आशंका और मजबूत होती है कि अपराधियों ने पहले से पूरी रणनीति बना रखी थी। यदि ऐसा है, तो पुलिस को इस केस में तकनीकी साक्ष्य, मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल, घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी फुटेज और नामजद लोगों की गतिविधियों की गहराई से जांच करनी चाहिए थी। लेकिन अब तक की स्थिति देखकर ऐसा नहीं लगता कि जांच उस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, जिसकी अपेक्षा इस तरह के जघन्य हत्याकांड में की जाती है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पुलिस की शुरुआती सुस्ती ने अपराधियों को बढ़त दे दी। जिस केस में पहले दिन से सख्ती और तेजी दिखाई जानी चाहिए थी, वह मामला अब एक सप्ताह बाद भी सवालों के घेरे में है। यही कारण है कि मृतक के परिजन अब सिर्फ गिरफ्तारी नहीं, बल्कि निष्पक्ष और तेज जांच की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर समय रहते पुलिस सक्रिय होती, तो शायद अब तक हत्या की वजह और अपराधियों की भूमिका दोनों साफ हो चुकी होतीं।

यह मामला अब सिर्फ एक परिवार के न्याय की लड़ाई नहीं, बल्कि समस्तीपुर पुलिस की कार्यशैली की परीक्षा भी बन गया है। एक सरकारी कर्मचारी, वह भी रेलवे के लोको पायलट की इस तरह बीच रास्ते हत्या हो जाना और फिर पूरे एक सप्ताह तक पुलिस का ठोस नतीजे तक न पहुंच पाना, कानून-व्यवस्था पर भी सवाल खड़ा करता है। अगर नामजद प्राथमिकी के बावजूद जांच इतनी धीमी रहेगी, तो आम लोगों का भरोसा पुलिस पर कैसे कायम रहेगा — यह सवाल अब ताजपुर से निकलकर पूरे जिले में उठने लगा है।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और संभावना जताई जा रही है कि पूछताछ के लिए कुछ और लोगों को थाने लाया जा सकता है। हालांकि, जब तक पुलिस इस हत्याकांड के पीछे की असली वजह, अपराधियों की भूमिका और घटना के पूरे घटनाक्रम का खुलासा नहीं करती, तब तक यह मामला लोगों के बीच पुलिस की नाकामी की मिसाल बनकर चर्चा में बना रहेगा।

गौरतलब है कि,एक सप्ताह बीत जाने के बाद भी यदि पुलिस किसी हत्याकांड की वजह तक नहीं पहुंच पाती, तो यह केवल जांच की धीमी रफ्तार नहीं बल्कि कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल है। ताजपुर के लोको पायलट हत्याकांड में अब जरूरत सिर्फ औपचारिक जांच की नहीं, बल्कि तेज, निष्पक्ष और परिणाम देने वाली कार्रवाई की है। क्योंकि न्याय में देरी, कई बार न्याय से इनकार जैसी लगने लगती है।

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